पाटी नगर पंचायत का फैसला कांग्रेस के खिलाफ, मुख्यमंत्री धामी की छवि बिगाड़ने की कोशिश पर उठे सवाल

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पाटी नगर पंचायत का फैसला कांग्रेस के खिलाफ, मुख्यमंत्री धामी की छवि बिगाड़ने की कोशिश पर उठे सवाल

 

चंपावत जिले की नवगठित पाटी नगर पंचायत के चुनाव परिणामों को लेकर राजनीतिक भ्रम फैलाने की कोशिशें तेज हो गई हैं। कुछ विपक्षी समर्थक और सोशल मीडिया हैंडल इस परिणाम को मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की हार बताने का प्रयास कर रहे हैं, जबकि जमीनी और राजनीतिक वास्तविकता इससे बिल्कुल अलग है।

सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि पाटी नगर पंचायत लोहाघाट विधानसभा क्षेत्र के अंतर्गत आती है, जहां वर्तमान में कांग्रेस का विधायक है। ऐसे में यदि किसी राजनीतिक दल की प्रतिष्ठा इस चुनाव परिणाम से प्रभावित हुई है तो वह कांग्रेस है, क्योंकि क्षेत्र उसका प्रतिनिधित्व करता है।

चुनाव परिणाम में कांग्रेस का प्रदर्शन इतना कमजोर रहा कि पार्टी का उम्मीदवार अपनी जमानत तक नहीं बचा सका, जबकि मुकाबला निर्दलीय उम्मीदवार के पक्ष में गया। ऐसे में कांग्रेस की हार को भाजपा या मुख्यमंत्री धामी की हार बताना तथ्यों को तोड़-मरोड़कर पेश करने जैसा है।

राजनीतिक जानकारों का कहना है कि स्थानीय निकाय चुनावों में कई बार निर्दलीय उम्मीदवार स्थानीय मुद्दों और व्यक्तिगत जनाधार के आधार पर जीत दर्ज करते हैं। उत्तराखंड के निकाय चुनावों में भी बड़ी संख्या में निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत हासिल की थी और कई स्थानों पर उन्होंने भाजपा व कांग्रेस दोनों दलों के समीकरण प्रभावित किए थे

विशेष बात यह भी है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की विधानसभा चंपावत क्षेत्र में भाजपा का प्रदर्शन लगातार मजबूत रहा है और पूर्व के निकाय चुनावों में चंपावत क्षेत्र के नगर निकायों में भाजपा को सफलता भी मिली थी। ऐसे में पाटी नगर पंचायत के परिणाम को सीधे मुख्यमंत्री धामी की लोकप्रियता से जोड़ना राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित प्रतीत होता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि पाटी नगर पंचायत का परिणाम किसी दल के लिए आत्ममंथन का विषय है तो वह कांग्रेस है, क्योंकि कांग्रेस विधायक के क्षेत्र में पार्टी उम्मीदवार का जमानत गंवाना स्थानीय संगठन की कमजोरी को उजागर करता है। वहीं निर्दलीय उम्मीदवार की जीत यह संकेत देती है कि मतदाताओं ने स्थानीय स्तर पर अलग विकल्प को चुना।

 

पाटी नगर पंचायत का जनादेश स्थानीय परिस्थितियों और उम्मीदवारों के पक्ष-विपक्ष में पड़ा वोट है। इसे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की हार बताना तथ्यात्मक रूप से गलत और जनता को भ्रमित करने वाला राजनीतिक दुष्प्रचार माना जा रहा है। वास्तविकता यह है कि कांग्रेस विधायक के क्षेत्र में कांग्रेस की जमानत जब्त हुई और जीत निर्दलीय उम्मीदवार के खाते में गई। इसलिए इस परिणाम को भाजपा विरोधी नैरेटिव बनाने का प्रयास राजनीतिक तथ्यों से मेल नहीं खाता।

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