सुशासन की उसी राह पर धामी, जिसे खंडूरी ने दी थी पहचान लोकायुक्त चयन के लिए सर्च कमेटी गठन से जवाबदेही होगी और मजबूत

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सुशासन की उसी राह पर धामी, जिसे खंडूरी ने दी थी पहचान लोकायुक्त चयन के लिए सर्च कमेटी गठन से जवाबदेही होगी और मजबूत

 

मुख्यमंत्री धामी ने लोकायुक्त चयन के लिए सर्च कमेटी गठित कर भ्रष्टाचार के विरुद्ध संस्थागत निगरानी को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। उत्तराखंड सरकार द्वारा लोकायुक्त अध्यक्ष एवं सदस्यों के चयन हेतु उच्चस्तरीय खोजबीन समिति (सर्च कमेटी) का गठन किया गया है, जिससे राज्य में पारदर्शिता, जवाबदेही और सुशासन को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

उत्तराखंड लोकायुक्त अधिनियम-2014 के तहत गठित चयन समिति की संस्तुति पर बनाई गई इस खोजबीन समिति में न्यायिक, प्रशासनिक और शैक्षणिक क्षेत्र के अनुभवी व्यक्तियों को शामिल किया गया है। समिति का दायित्व लोकायुक्त अध्यक्ष एवं सदस्य पदों के लिए योग्य, निष्पक्ष और सक्षम व्यक्तियों का पैनल तैयार कर चयन समिति को उपलब्ध कराना होगा।

गठित खोजबीन समिति के अध्यक्ष के रूप में न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) आलोक वर्मा, पूर्व न्यायाधीश, उच्च न्यायालय नैनीताल को जिम्मेदारी सौंपी गई है। वहीं पूर्व मुख्य सचिव इन्दु कुमार पाण्डेय, पूर्व मुख्य सचिव सुभाष कुमार, पूर्व मुख्य सचिव श्रीमती राधा रतूड़ी तथा दून विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. सुरेखा डंगवाल को समिति का सदस्य बनाया गया है। अनुभवी और प्रतिष्ठित व्यक्तित्वों की मौजूदगी से चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता और विश्वसनीयता और अधिक मजबूत होने की उम्मीद जताई जा रही है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि मुख्यमंत्री धामी लगातार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रहे हैं। नकल माफिया, भू-माफिया, अवैध अतिक्रमण और भ्रष्टाचार के मामलों में सख्त कार्रवाई के बाद अब लोकायुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया को आगे बढ़ाना सरकार की जवाबदेह और पारदर्शी शासन व्यवस्था के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

खोजबीन समिति में सेवानिवृत्त न्यायाधीश, पूर्व मुख्य सचिवों और शिक्षाविद को शामिल कर सरकार ने यह स्पष्ट संदेश दिया है कि लोकायुक्त जैसी संवैधानिक महत्व की संस्था के गठन में योग्यता, निष्पक्षता और अनुभव को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। यह कदम प्रशासनिक जवाबदेही को मजबूत करने के साथ-साथ जनता के विश्वास को भी और सुदृढ़ करेगा।

राज्य के विभिन्न वर्गों का मानना है कि लोकायुक्त की प्रभावी स्थापना से भ्रष्टाचार संबंधी शिकायतों की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष जांच का तंत्र मजबूत होगा। इससे शासन में पारदर्शिता बढ़ेगी और आम जनता को न्याय मिलने की प्रक्रिया और अधिक सशक्त बनेगी।

मुख्यमंत्री धामी के इस निर्णय को उत्तराखंड में सुशासन, पारदर्शिता और भ्रष्टाचार मुक्त प्रशासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में देखा जा रहा है। लोकायुक्त चयन प्रक्रिया को गति देकर धामी सरकार ने यह संदेश दिया है कि विकसित उत्तराखंड के निर्माण में जवाबदेह और पारदर्शी शासन उसकी सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है।

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